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गुस्सा आने से कैसे रोके ? How to control anger ?

गुस्सा या क्रोध को रोकने या कण्ट्रोल करने के तरीके जानने से पहले हमे ये जान लेना जरूरी है की गुस्सा क्यों और कैसे आता है. आप पूछेंगे की अरे ये भी कोई जानने वाली बात है की गुस्सा क्यों आता है, ये तो हमे पता ही है की अगर कोई कुछ गलत करता है तो उसपर हमें गुस्सा आता है. या फिर कोई चीज अगर हमारे मुताबिक नहीं होता है तो भी हमें गुस्सा आता है. ये बात तो बिलकुल क्लियर ही है.

हाँ ये बात सही है लेकिन ये सिर्फ ऊपर ऊपर का सच है गुस्सा आने का प्रमुख कारन कुछ और ही है. या यूँ कहे की गुस्सा आने का कोई कारण ही नहीं होता. गुस्सा या क्रोध का आना मनुष्य या जानवर का स्वाभिक गुण है. हम गुस्सा आने की वजह ढूंढ़ते हैं इसी वजह से हमे लगता है की गुस्सा आने की वजह ये है. असल में चाहे हम वजह दे या न दे गुस्सा अपनी वजह ढून्ढ ही लेगा. इतना समझ लीजिये की जो चीज नेचुरल है उसको किसी भी तरीके से रोका या दबाया जा ही नहीं सकता. चलीये इस बात को सरल तरीके से समझने का प्रयास करते है.

क्या नदी को आप रोक सकते हैं ? आप कहेंगे हाँ नदी के पानी को तो रोक के रखा जाता है डेम में. लेकिन चूँकि नदी को रोखना नेचुरली सही नहीं है इसलिए उसे ज्यादा दिन तक रोक पाना भी मुश्किल होता है. एक न एक दिन उसे छोड़ना ही पड़ता है. क्युकी अगर आपने उसे नहीं छोड़ा तो एक दिन वो आपसे बिना पूछे आपके शहर को डूबा के ले जाएगी। इसलिए आप उसे केवल सही डायरेक्शन दे सकते है. आप ये कर सकते है की आप नदी के बहाव की दिशा को समंदर की तरफ मोड़ सकते है ताकि समंदर में मिलकर उनका प्रभाव का रूप ही बदल जाये. नदी समंदर में मिलकर मिटता नहीं बल्कि वो समंदर में मिलकर शांत हो जाता है. अपने अस्तित्व को खोकर समंदर के अस्तित्व में मिल जाता है.

आप सोचेंगे मैं आपको ये क्या फालतू का उदहारण दे रहा हूँ, इससे गुस्सा को कम करने का क्या लेना देना. लेकिन अगर वाकई में आपको क्रोध को कण्ट्रोल या ख़तम करना चाहते है तो आपको मेरे बात पर गौर करना ही पड़ेगा क्युकी चाहे गुस्सा हो या प्रेम या अन्य किसी भी प्रकार का मन का भाव, अगर इनके बारे में आपको जानना हो तो आपको इसके गहराई में उतरना ही पड़ेगा नहीं तो आप कितने भी मोटिवेशनल वीडियोस देखले या कितने ही आर्टिकल पड़ ले आप गुस्सा को कण्ट्रोल कर ही नहीं सकते. क्युकी गुस्सा को कण्ट्रोल करने के लिए पहले गुस्सा को समझना ही पड़ता है. बिना इसे जाने आप बस ऊपर ऊपर से जबरदस्ती अपने क्रोध को दबाने की नाकाम कोशिश जिंदगी भर करते रह जायेंगे पर ये न हो पायेगा। एक दिन न एक दिन उभरकर आएगा ही आएगा चाहे वजह हो या न हो क्युकी सूरज को निकलने के लिए कोई वजह नहीं चाहिए होती. सूरज का गुण/धर्म है निकलना तो वो निकलेगा ही. बादल बस कुछ देर तक रौशनी को हम तक पहुंचने नहीं देता. इसका मतलब ये नहीं की सूरज का प्रभाव कम या ख़तम हो गया है.

चलिए अब आपको सीधा ये बताता हूँ की आप क्या कर सकते हैं अपने गुस्से के लिए.

देखिये, हमारे अंदर अदृस्य रूप में अनगिनत भाव होते है. जिनमे से बस कुछ ही के बारे में हमे पता है या यूँ कहें की पता चल पाता है. जो हर वक़्त किसी न किसी रूप में हमारे अंदर ही उठता रहता है और हमे पता चलता है. इनमे से प्रमुख रूप से दो भाव होते है जो की हममे जन्म से ही होते है वो हैं "क्रोध और प्रेम". और कुछ भाव को हम खुद जगाते है और बाकी भाव अभी भी अदृश्य रूम में हमारे अंदर ही विद्यमान है. जिसे एक साधारण इंसान जगा नहीं पाता है इसक लिए असाधारण बनना पड़ता है और इनके जगाने के तरीके भी अलग होते हैं.

हमारे मन के भाव क्या है ? मन के भाव अदृश्य एनर्जी होते है. और अगर ये एनर्जी एक बार आपमें उठ गया तो इसे दबाने का कोई तरीका नहीं है. इसे आप सिर्फ दो ही तरीके से ख़तम कर सके है. या तो आप इसे बाहर निकल दे या फिर इसे जान ले.

अभी सिर्फ हम गुस्सा या क्रोध के बारे में बात करंगे बकी के भाव के विषय में हम दूसरे आर्टिकल में चर्चा करेंगे, क्युकी ये पोस्ट लम्बा होता जा रहा है.

मान लोजिये आपको किसी पर गुस्सा आया. फिर आप क्या करते है ? मुझे मालूम हैं की अभी आप दो ही चीज करते है. या तो आप सामने वाले पे निकाल देते हैं या फिर अगर आप सामने वाले से किसी भी तरीके से कमजोर या मजबूर मालूम पड़ते हो तो गुस्सा को अपने अंदर ही दबा लेते है. वो कहते हैं न की गुस्सा को पी जाते है. लेकिन मत पीजिये जहर है ये. पीजिये तो जहर है और निकालो तो कहर है. फिर क्या करें ?

देखिये, गुस्सा को न निकलना है और न ही पीना है, बस देखना है. हां आपने सही पढ़ा, गुस्सा को सिर्फ देखना है. कभी देखा है आपने गुस्सा को जब करते है. नहीं देखा होगा क्युकी जब हम गुस्सा करते है तो हमारा सारा ध्यान सामने वाले पे होता है की कैसे बदला लूँ इससे, कैसे निकालूँ की सारा मन का भड़ास निकल जाये. लेकिन निकलने के बाद तो आपको पता ही है कैसी कैसी झंझट में पड़ जाते हैं आप. और अगर किसी तरह गुस्सा को पि गए तो और बड़ी झंझट। क्युकी निकालते तो शयद कुछ दिन की ही झंझट होती लेकिन दबाने से ये झंझट पूरी ज़िन्दगी भर पीछा करती रहती है. आपके मन में हमेशा के लिए ये बात घर कर जाती है की मैं उससे बदला नहीं ले पाया. और इस तरह से यहीं भाव आपके जीवन में indirect तरीके से किसी और रूप में अपना असर करने लगती है और आपको पता भी नहीं चलता है की ये उस गुस्से को दबाने की वजह से हुई.

अब सवाल ये है की गुस्सा को देखने से गुस्सा कैसे ख़तम होगा और ये भी कोई देखने वाली चीज है भला. लेकिन इस सवाल का जवाब सिर्फ एक ही है वह ये की आपको ये प्रेक्टिकली करके देखना ही पड़ेगा यह बताके समझया नहीं जा सकता है. इसे सिर्फ आप अनुभब से ही जान सकते है. मैं सिर्फ तरीका बता सकता हु की कैसे करना है.

जब भी आपको किसी पे भी गुस्सा आये चाहे किसी पे भी और किसी बात पे भी चाहे छोटी हो या बड़ी. आपको करना ये है की ज्यूँ ही गुस्सा आया उसी वक़्त आप अपने ध्यान को तुंरत सामने वाले से हटाकर अपने अंदर ले आएं आप देखेंगे की आपके अंदर कुछ हो रहा है और आप इस चीज को फील कर पाएंगे और जान पाएंगे की हां कुछ तो हो रहा है अंदर जो अच्छा नहीं लग रहा है अच्छा फील नहीं करा रहा है. जैसे की जब आपको किसी से प्यार हो जाता है है तो कैसा फील होता है. एक तरंग सा उठता है मन में और आप उस प्यार को पाने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए राजी हो जाते है. असल में आप किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि उस तरंग का फील, वो मज़ा पाना चाहते है जो आपको उस व्यक्ति को देखने से ही मिलता है. ठीक उसी तरह क्रोध के समय में भी आपके मन में तरंगे उठती है. और मज़े की बात ये है की जैसे ही आप अपना ध्यान इन तरंगों पर लाते है ये तरंगे धीरे धीरे गायब होने लगती है. और फिर आप धीरे धीरे बिलकुल नार्मल अवस्था में आ जाते हैं. आपको अगर बिश्वास नहीं हो रहा तो कभी अपने किसी चोट के दर्द को देखना, अपना पूरा ध्यान लगा देना और दर्द के तरंग को लगातार देखते रहना। आप पाएंगे की आपका दर्द धीरे धीरे कम हो रहा है. करके देखना एकबार फिर कमेंट में शेयर करना अपना अनुभव। आज के लिए इतना ही. फिर मिलता हूँ. अगर पसंद आये तो शेयर करना और कमेंट में बताना की और किस टॉपिक पे आप जानना चाहते हैं.

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